प्रतिज्ञा - Pratigya

चलो जी जरा सिनेमा देख आएँ, तुमने एक बार तो नहीं की होगी, फिर चुपके से चले गए होंगे। जानते तो थे ही, लौंडी बैठी रहेगी।'

प्रेमा - 'जी, ऐसे ही बड़े शीलवान तो हैं आप, यह क्यों नहीं कहते कि वहाँ की बहार देखने को जी ललच उठा।'

प्रेमा - 'उन्हें तो भोजन करके सुला दिया। इस वक्त जागती होतीं, तो तुमसे डंडों से बातें करतीं। सारी शरारत भूल जाते।'

प्रेमा - 'सिखा रहे हो, तो वह भी सीख लूँगी। भैया से मेल हुआ है, तो मेरी दशा भी भाभी की-सी हो कर रहेगी।'


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चलो जी जरा सिनेमा देख आएँ, तुमने एक बार तो नहीं की होगी, फिर चुपके से चले गए होंगे। जानते तो थे ही, लौंडी बैठी रहेगी।'

प्रेमा - 'जी, ऐसे ही बड़े शीलवान तो हैं आप, यह क्यों नहीं कहते कि वहाँ की बहार देखने को जी ललच उठा।'

प्रेमा - 'उन्हें तो भोजन करके सुला दिया। इस वक्त जागती होतीं, तो तुमसे डंडों से बातें करतीं। सारी शरारत भूल जाते।'

प्रेमा - 'सिखा रहे हो, तो वह भी सीख लूँगी। भैया से मेल हुआ है, तो मेरी दशा भी भाभी की-सी हो कर रहेगी।'


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