जी ने कहा - 'मैं आपके सामने व्याख्यान देने नहीं आया हूँ।'
अमरनाथ - 'बातें बहुत हो चुकीं, अब काम करने का समय है।'
अमरनाथ - 'आप लोगों में जिन महाशयों को पत्नी-वियोग हो चुका है, वह कृपया हाथ उठाएँ।'
अमरनाथ - 'आप लोगों में कितने महाशय ऐसे हैं, जो वैधव्य की भँवर में पड़ी हुई अबलाओं के साथ अपने कर्तव्य का पालन करने का साहस रखते हैं। कृपया वे हाथ उठाए रहें।'
दाननाथ ने अमृतराय के कान में कहा - 'यह तुम क्या कर रहे हो! हाथ नीचे करो।'
जी ने कहा - 'मैं आपके सामने व्याख्यान देने नहीं आया हूँ।'
अमरनाथ - 'बातें बहुत हो चुकीं, अब काम करने का समय है।'
अमरनाथ - 'आप लोगों में जिन महाशयों को पत्नी-वियोग हो चुका है, वह कृपया हाथ उठाएँ।'
अमरनाथ - 'आप लोगों में कितने महाशय ऐसे हैं, जो वैधव्य की भँवर में पड़ी हुई अबलाओं के साथ अपने कर्तव्य का पालन करने का साहस रखते हैं। कृपया वे हाथ उठाए रहें।'
दाननाथ ने अमृतराय के कान में कहा - 'यह तुम क्या कर रहे हो! हाथ नीचे करो।'