प्रतिज्ञा - Pratigya

पर पूर्णा का कलेजा सन्न-से हो गया। चेहरे का रंग उड़ गया। भगवान, कहीं इसने देख तो नहीं लिया?

प्रश्न बिल्कुल साधारण था, किंतु पूर्णा को ऐसा जान पड़ा कि यह उस मुख्य विषय की भूमिका है। इतने सबेरे जाग जाना ऐसा लांछन था, जिसे स्वीकार करने में किसी भयंकर बाधा की शंका हुई। बोली - 'क्या बहुत सबेरा है? रोज ही की बेला तो है।'

पूर्णा का कलेजा धक-धक करने लगा। यह दूसरा और पहले से भी बड़ा लांछन था। इसे वह कैसे स्वीकार कर सकती थी? बोली - 'नहीं बहन,


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पर पूर्णा का कलेजा सन्न-से हो गया। चेहरे का रंग उड़ गया। भगवान, कहीं इसने देख तो नहीं लिया?

प्रश्न बिल्कुल साधारण था, किंतु पूर्णा को ऐसा जान पड़ा कि यह उस मुख्य विषय की भूमिका है। इतने सबेरे जाग जाना ऐसा लांछन था, जिसे स्वीकार करने में किसी भयंकर बाधा की शंका हुई। बोली - 'क्या बहुत सबेरा है? रोज ही की बेला तो है।'

पूर्णा का कलेजा धक-धक करने लगा। यह दूसरा और पहले से भी बड़ा लांछन था। इसे वह कैसे स्वीकार कर सकती थी? बोली - 'नहीं बहन,


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