प्रतिज्ञा - Pratigya

तुम्हें भ्रम हो रहा है। रात बहुत सोई। एक ही नींद में भोर हो गया। बहुत सो जाने से भी आँखें लाल हो जाती हैं।'

पूर्णा ने जोर दे कर कहा - 'वाह! इतनी बात तुम्हें मालूम नहीं। तुम्हें अलबत्ता नींद नहीं आई। क्या सारी रात जागती रहीं?'

पूर्णा - 'तुम तो व्यर्थ का मान किए बैठी हो बहन! एक बार चली क्यों नहीं जाती?'

यह कहते-कहते उसे रात का अपमान याद आ गया। वह घंटों द्वार पर खड़ी थी। वह जागते थे - अवश्य जागते थे, फिर भी किवाड़


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तुम्हें भ्रम हो रहा है। रात बहुत सोई। एक ही नींद में भोर हो गया। बहुत सो जाने से भी आँखें लाल हो जाती हैं।'

पूर्णा ने जोर दे कर कहा - 'वाह! इतनी बात तुम्हें मालूम नहीं। तुम्हें अलबत्ता नींद नहीं आई। क्या सारी रात जागती रहीं?'

पूर्णा - 'तुम तो व्यर्थ का मान किए बैठी हो बहन! एक बार चली क्यों नहीं जाती?'

यह कहते-कहते उसे रात का अपमान याद आ गया। वह घंटों द्वार पर खड़ी थी। वह जागते थे - अवश्य जागते थे, फिर भी किवाड़


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