तो कोई स्त्री की बात भी न पूछता। जो स्त्रियाँ बाँझ रह जाती हैं, उनकी कितनी दुर्दशा होती है रोज ही देखती हो। हाँ, लंपटों की बात छोड़ो, जो वेश्याओं पर प्राण देते हैं।'
सुमित्रा - 'वह निकम्मे पुरुष होंगे।'
पूर्णा - 'यह तो संसार की प्रथा ही है, बहन। मर्द स्त्री से बल में, बुद्धि में, पौरुष में अक्सर बढ़ कर होता है, इसीलिए उसकी हुकूमत है। जहाँ पुरुष के बदले स्त्री में यह गुण हैं, वहाँ स्त्रियों ही की चलती है। मर्द कमा कर खिलाता है, क्यों रोब जमाने से भी जाए।'
तो कोई स्त्री की बात भी न पूछता। जो स्त्रियाँ बाँझ रह जाती हैं, उनकी कितनी दुर्दशा होती है रोज ही देखती हो। हाँ, लंपटों की बात छोड़ो, जो वेश्याओं पर प्राण देते हैं।'
सुमित्रा - 'वह निकम्मे पुरुष होंगे।'
पूर्णा - 'यह तो संसार की प्रथा ही है, बहन। मर्द स्त्री से बल में, बुद्धि में, पौरुष में अक्सर बढ़ कर होता है, इसीलिए उसकी हुकूमत है। जहाँ पुरुष के बदले स्त्री में यह गुण हैं, वहाँ स्त्रियों ही की चलती है। मर्द कमा कर खिलाता है, क्यों रोब जमाने से भी जाए।'