पूर्णा - 'लेकिन प्रश्न तो रक्षा का है। उनकी रक्षा कौन करेगा?'
पूर्णा - 'लंपटों के मारे उनका रहना कठिन हो जाएगा।'
पूर्णा ने गंभीर भाव से कहा - 'समय आएगा, तो वह भी हो जाएगा, बहन अभी तो स्त्री की रक्षा मर्द ही करता है।'
पूर्णा - 'ये सारी बातें तभी तक हैं, जब तक पति-देव रूठे हुए हैं। अभी आ कर गले लगा लें, तो तुम पैर चूमने लगोगी।'
इतने में कहार ने आ कर कहा - 'बहू जी, बाबू जी ने रेशमी अचकन माँगी है।'
कहार ने हाथ जोड़ कर कहा - 'सरकार,
पूर्णा - 'लेकिन प्रश्न तो रक्षा का है। उनकी रक्षा कौन करेगा?'
पूर्णा - 'लंपटों के मारे उनका रहना कठिन हो जाएगा।'
पूर्णा ने गंभीर भाव से कहा - 'समय आएगा, तो वह भी हो जाएगा, बहन अभी तो स्त्री की रक्षा मर्द ही करता है।'
पूर्णा - 'ये सारी बातें तभी तक हैं, जब तक पति-देव रूठे हुए हैं। अभी आ कर गले लगा लें, तो तुम पैर चूमने लगोगी।'
इतने में कहार ने आ कर कहा - 'बहू जी, बाबू जी ने रेशमी अचकन माँगी है।'
कहार ने हाथ जोड़ कर कहा - 'सरकार,