प्रतिज्ञा - Pratigya

निकाल के दे दें, नाहीं हमार कुंदी होय लगी, चमड़ी उधेड़ ले हैं।'

कहार चला गया, तो पूर्णा ने कहा - 'बहन, क्यों रार बढ़ाती हो। लाओ मुझे कुंजी दे दो, मैं निकाल कर दे दूँ। उनका क्रोध जानती हो?'

कहार ने लौट कर कहा - 'सरकार कहते हैं कि अचकन लोहे वाली संदूक में धरी है।'

कहार - 'इ तो हम नहीं कहा सरकार! आप दूनों परानी छिन भर माँ एक्के होइ हैं, बीच में हमारा कुटम्मस होइ जाई।'

कहार मुँहलगा था। बोला - 'सरकार का जितना मारै का होय मार लें,


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निकाल के दे दें, नाहीं हमार कुंदी होय लगी, चमड़ी उधेड़ ले हैं।'

कहार चला गया, तो पूर्णा ने कहा - 'बहन, क्यों रार बढ़ाती हो। लाओ मुझे कुंजी दे दो, मैं निकाल कर दे दूँ। उनका क्रोध जानती हो?'

कहार ने लौट कर कहा - 'सरकार कहते हैं कि अचकन लोहे वाली संदूक में धरी है।'

कहार - 'इ तो हम नहीं कहा सरकार! आप दूनों परानी छिन भर माँ एक्के होइ हैं, बीच में हमारा कुटम्मस होइ जाई।'

कहार मुँहलगा था। बोला - 'सरकार का जितना मारै का होय मार लें,


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