दाननाथ - 'प्रेमा सुनेगी तो क्या कहेगी?'
दाननाथ - 'अजी जाओ भी, बातें बनाते हो। उसे तुमसे कितना प्रेम है, तुम खूब जानते हो। यद्यपि अभी विवाह नहीं हुआ, लेकिन सारा शहर जानता है कि वह तुम्हारी मँगेतर है। सोचो, उसे तुम कितनी बार प्रेम-पत्र लिख चुके हो। तीन साल से वह तुम्हारे नाम पर बैठी हुई है। भले आदमी, ऐसा रत्न तुम्हें संसार में और कहाँ मिलेगा? अगर तुमने उससे विवाह न किया तो तुम्हारा जीवन नष्ट हो जाएगा। तुम कर्तव्य के
दाननाथ - 'प्रेमा सुनेगी तो क्या कहेगी?'
दाननाथ - 'अजी जाओ भी, बातें बनाते हो। उसे तुमसे कितना प्रेम है, तुम खूब जानते हो। यद्यपि अभी विवाह नहीं हुआ, लेकिन सारा शहर जानता है कि वह तुम्हारी मँगेतर है। सोचो, उसे तुम कितनी बार प्रेम-पत्र लिख चुके हो। तीन साल से वह तुम्हारे नाम पर बैठी हुई है। भले आदमी, ऐसा रत्न तुम्हें संसार में और कहाँ मिलेगा? अगर तुमने उससे विवाह न किया तो तुम्हारा जीवन नष्ट हो जाएगा। तुम कर्तव्य के