प्रतिज्ञा - Pratigya

स्वयं एक कदम आगे बढ़ आई। उसकी दशा उस मनुष्य की-सी हो गई, जिसने अनजाने में किसी बालक का पैर कुचल दिया हो और जो उसे वेदना से छटपटाते देख, जल्दी से दौड़ कर उसे गोद में उठा ले। कमलाप्रसाद जिस दिन साड़ी लाए थे, उसी दिन से पूर्णा को कुछ शंका हो गई थी, पर उसने पुरूषों का विनोद समझ लिया था। अतएव इस समय यह प्रेमालाप सुन कर भयभीत हो गई। घबराई हुई आवाज से बोली - 'ऐसी बातें न करो, बाबूजी। मेरा लोक और परलोक मत बिगाड़ो। फिर मैं सचमुच


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स्वयं एक कदम आगे बढ़ आई। उसकी दशा उस मनुष्य की-सी हो गई, जिसने अनजाने में किसी बालक का पैर कुचल दिया हो और जो उसे वेदना से छटपटाते देख, जल्दी से दौड़ कर उसे गोद में उठा ले। कमलाप्रसाद जिस दिन साड़ी लाए थे, उसी दिन से पूर्णा को कुछ शंका हो गई थी, पर उसने पुरूषों का विनोद समझ लिया था। अतएव इस समय यह प्रेमालाप सुन कर भयभीत हो गई। घबराई हुई आवाज से बोली - 'ऐसी बातें न करो, बाबूजी। मेरा लोक और परलोक मत बिगाड़ो। फिर मैं सचमुच


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