रखा और चाहा कि पूर्णा का हाथ पकड़ ले। पूर्णा पीछे हट गई। कमलाप्रसाद और आगे बढ़ा। सहसा पूर्णा ने दोनों हाथों से कुर्सी उठा ली और उसे कमलाप्रसाद के मुँह पर झोंक दिया। कुर्सी का एक पाया पूरे जोर के साथ कमलाप्रसाद के मुँह पर पड़ा, नाक में गहरी चोट आई और एक दाँत भी टूट गया। कमलाप्रसाद इस झोंके से न सँभल सका। चारों खाने चित्त जमीन पर गिर पड़ा। नाक से खून जारी हो गया, उसे मूर्छा आ गई। उसे इसी दशा में छोड़ कर पूर्णा लपक कर बगीचे
रखा और चाहा कि पूर्णा का हाथ पकड़ ले। पूर्णा पीछे हट गई। कमलाप्रसाद और आगे बढ़ा। सहसा पूर्णा ने दोनों हाथों से कुर्सी उठा ली और उसे कमलाप्रसाद के मुँह पर झोंक दिया। कुर्सी का एक पाया पूरे जोर के साथ कमलाप्रसाद के मुँह पर पड़ा, नाक में गहरी चोट आई और एक दाँत भी टूट गया। कमलाप्रसाद इस झोंके से न सँभल सका। चारों खाने चित्त जमीन पर गिर पड़ा। नाक से खून जारी हो गया, उसे मूर्छा आ गई। उसे इसी दशा में छोड़ कर पूर्णा लपक कर बगीचे