प्रतिज्ञा - Pratigya

कोई नहीं है। एक नातेदार के यहाँ पड़ी थी, आज उसने भी निकाल दिया।'

'नहीं महाराज! सोचती थी, रात-भर वहीं घाट पर पड़ी रहूँगी। सवेरे किसी जगह खाना पकाने की नौकरी कर लूँगी।'

बोला - 'वनिता भवन में क्यों नहीं चली जाती?'

'वहाँ अनाथ स्त्रियों का पालन किया जाता है। कैसी ही स्त्री हो, वह लोग बड़े हर्ष से उसे अपने यहाँ रख लेते हैं। अमृतराय बाबू को दुनिया चाहे कितना ही बदनाम करे, पर काम उन्होंने बड़े धर्म का किया है। इस समय पचास


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कोई नहीं है। एक नातेदार के यहाँ पड़ी थी, आज उसने भी निकाल दिया।'

'नहीं महाराज! सोचती थी, रात-भर वहीं घाट पर पड़ी रहूँगी। सवेरे किसी जगह खाना पकाने की नौकरी कर लूँगी।'

बोला - 'वनिता भवन में क्यों नहीं चली जाती?'

'वहाँ अनाथ स्त्रियों का पालन किया जाता है। कैसी ही स्त्री हो, वह लोग बड़े हर्ष से उसे अपने यहाँ रख लेते हैं। अमृतराय बाबू को दुनिया चाहे कितना ही बदनाम करे, पर काम उन्होंने बड़े धर्म का किया है। इस समय पचास


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