प्रतिज्ञा - Pratigya

किंतु प्रेमा-जैसी अनुपम सुंदरी का त्याग करना आसान न था। ऐसी दशा में अमृतराय की ये बातें सुन कर दाननाथ का हृदय आशा से पुलकित हो उठा। जिस आशा को उन्होंने हृदय को चीर कर निकाल डाला था, जिसकी इस जीवन में वह कल्पना भी न कर सकते थे, जिसकी अंतिम ज्योति बहुत दिन हुए शांत हो चुकी थी, वही आशा आज उनके मर्मस्थल को चंचल करने लगी। इसके साथ ही अमृतराय के देवोपम त्याग ने उन्हें वशीभूत कर लिया। वह गदगद कंठ से बोले - 'क्या इसीलिए तुमने


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किंतु प्रेमा-जैसी अनुपम सुंदरी का त्याग करना आसान न था। ऐसी दशा में अमृतराय की ये बातें सुन कर दाननाथ का हृदय आशा से पुलकित हो उठा। जिस आशा को उन्होंने हृदय को चीर कर निकाल डाला था, जिसकी इस जीवन में वह कल्पना भी न कर सकते थे, जिसकी अंतिम ज्योति बहुत दिन हुए शांत हो चुकी थी, वही आशा आज उनके मर्मस्थल को चंचल करने लगी। इसके साथ ही अमृतराय के देवोपम त्याग ने उन्हें वशीभूत कर लिया। वह गदगद कंठ से बोले - 'क्या इसीलिए तुमने


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