आज प्रतिज्ञा कर डाली? अगर वह मित्र तुम्हारी इस उदारता से लाभ उठाए, तो मैं कहूँगा वह मित्र नहीं, शत्रु है और यही क्या निश्चय है कि इस दशा में प्रेमा का विवाह तुम्हारे उसी मित्र से हो?'
दाननाथ ने तिरस्कार का भाव धारण करके कहा - 'तुम उसे इतना नीच समझना चाहते हो, तो समझ लो, लेकिन मैं कहे देता हूँ कि यदि मैं उस मित्र का ठीक अनुमान कर सका हूँ, तो वह अपने बदले तुम्हें निराशा की भेंट न होने देगा।'
यह कहते हुए दाननाथ बाहर निकल आए और अमृतराय द्वार पर खड़े,
आज प्रतिज्ञा कर डाली? अगर वह मित्र तुम्हारी इस उदारता से लाभ उठाए, तो मैं कहूँगा वह मित्र नहीं, शत्रु है और यही क्या निश्चय है कि इस दशा में प्रेमा का विवाह तुम्हारे उसी मित्र से हो?'
दाननाथ ने तिरस्कार का भाव धारण करके कहा - 'तुम उसे इतना नीच समझना चाहते हो, तो समझ लो, लेकिन मैं कहे देता हूँ कि यदि मैं उस मित्र का ठीक अनुमान कर सका हूँ, तो वह अपने बदले तुम्हें निराशा की भेंट न होने देगा।'
यह कहते हुए दाननाथ बाहर निकल आए और अमृतराय द्वार पर खड़े,