बदरीप्रसाद - 'अब इतनी रात गए मैं भोजन न करूँगा। थक भी बहुत गया हूँ। लेटते ही लेटते सो जाऊँगा।'
यह कह कर बदरीप्रसाद चारपाई पर बैठ गए और एक क्षण के बाद बोले - 'क्यों बेटी, पूर्णा के मैके कोई नहीं है? मैंने उससे नहीं पूछा कि शायद उसे कुछ दुःख हो।'
प्रेमा - 'मैके में कौन है। माँ-बाप पहले ही मर चुके थे, मामा ने विवाह कर दिया। मगर जब से विवाह हुआ, कभी झाँका तक नहीं। ससुराल में भी सगा कोई नहीं है। पंडित जी के दम से नाता था।'
बदरीप्रसाद - 'अब इतनी रात गए मैं भोजन न करूँगा। थक भी बहुत गया हूँ। लेटते ही लेटते सो जाऊँगा।'
यह कह कर बदरीप्रसाद चारपाई पर बैठ गए और एक क्षण के बाद बोले - 'क्यों बेटी, पूर्णा के मैके कोई नहीं है? मैंने उससे नहीं पूछा कि शायद उसे कुछ दुःख हो।'
प्रेमा - 'मैके में कौन है। माँ-बाप पहले ही मर चुके थे, मामा ने विवाह कर दिया। मगर जब से विवाह हुआ, कभी झाँका तक नहीं। ससुराल में भी सगा कोई नहीं है। पंडित जी के दम से नाता था।'