प्रतिज्ञा - Pratigya



बदरीप्रसाद ने बिछावन की चादर बराबर करते हुए कहा - 'मैं सोच रहा हूँ, पूर्णा को अपने ही घर में रखूँ तो क्या हरज है? अकेली औरत कैसे रहेगी।'

प्रेमा - 'होगा तो बहुत अच्छा, पर अम्माँ जी मानें तब तो?'

बदरीप्रसाद - 'मानेगी क्यों नहीं, पूर्णा तो इनकार न करेगी?'

प्रेमा - 'पूछूँगी। मैं समझती हूँ उन्हें इनकार न होगा।'

बदरीप्रसाद - 'अच्छा मान लो, वह अपने ही घर में रहे तो उसका खर्च बीस रुपए में चल जाएगा न?'

प्रेमा ने आर्द्र


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बदरीप्रसाद ने बिछावन की चादर बराबर करते हुए कहा - 'मैं सोच रहा हूँ, पूर्णा को अपने ही घर में रखूँ तो क्या हरज है? अकेली औरत कैसे रहेगी।'

प्रेमा - 'होगा तो बहुत अच्छा, पर अम्माँ जी मानें तब तो?'

बदरीप्रसाद - 'मानेगी क्यों नहीं, पूर्णा तो इनकार न करेगी?'

प्रेमा - 'पूछूँगी। मैं समझती हूँ उन्हें इनकार न होगा।'

बदरीप्रसाद - 'अच्छा मान लो, वह अपने ही घर में रहे तो उसका खर्च बीस रुपए में चल जाएगा न?'

प्रेमा ने आर्द्र


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