प्रतिज्ञा - Pratigya

वह इतना ही था कि वह अमृतराय के गहरे दोस्त हैं। उनमें बड़ी घनिष्ठता है। वह धनी नहीं थे, पर यह कोई ऐब न था, क्योंकि प्रेमा विलासिनी न थी। क्यों उसका मन अमृतराय की ओर बढ़ता था और दाननाथ की ओर से खिंचता था, इसका कोई कारण वह स्पष्ट नहीं कर सकती थी, पर इस परिस्थिति में उसके लिए और कोई उपाय नहीं था। फिर भी अब तक उसने दाननाथ को कभी इस दृष्टि से न देखा था। उसने मन में एक संकल्प कर लिया था। अब हृदय में वह स्थान खाली हो जाने के


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वह इतना ही था कि वह अमृतराय के गहरे दोस्त हैं। उनमें बड़ी घनिष्ठता है। वह धनी नहीं थे, पर यह कोई ऐब न था, क्योंकि प्रेमा विलासिनी न थी। क्यों उसका मन अमृतराय की ओर बढ़ता था और दाननाथ की ओर से खिंचता था, इसका कोई कारण वह स्पष्ट नहीं कर सकती थी, पर इस परिस्थिति में उसके लिए और कोई उपाय नहीं था। फिर भी अब तक उसने दाननाथ को कभी इस दृष्टि से न देखा था। उसने मन में एक संकल्प कर लिया था। अब हृदय में वह स्थान खाली हो जाने के


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