1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

ही कर सकता है। यही प्रत्याशा हमारे अंतर को प्रकाशित करती है और हमें सफलता का आश्वासन देती है तथा इसलिए हम सशपथ यह घोषणा करते हैं कि तुम्हारा हीरक जयंती वर्ष पुनरोदयी भारत को विजयी भाव के साथ विश्व में पर्दापण करते हुए देखे बिना नहीं व्यतीत होगा।

बहादुरशाह की अस्थियां अपनी कब्र से प्रतिशोध का आह्यन कर रही हैं। मंगल पांडे की आत्मा अभी भी सलीब पर से पवित्र मिशन की पूर्ति के लिए पुकार रही है।


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निडर


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ही कर सकता है। यही प्रत्याशा हमारे अंतर को प्रकाशित करती है और हमें सफलता का आश्वासन देती है तथा इसलिए हम सशपथ यह घोषणा करते हैं कि तुम्हारा हीरक जयंती वर्ष पुनरोदयी भारत को विजयी भाव के साथ विश्व में पर्दापण करते हुए देखे बिना नहीं व्यतीत होगा।

बहादुरशाह की अस्थियां अपनी कब्र से प्रतिशोध का आह्यन कर रही हैं। मंगल पांडे की आत्मा अभी भी सलीब पर से पवित्र मिशन की पूर्ति के लिए पुकार रही है।


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