कि मेरे कारावास की अवधि में मुझे हुक्का भिजवाने के लिए मैं आभारी हूं। वज्रादपि कठोरराणि मृदूनि कुसुमादपि। लोकोŸाराणां चेतांसि को हि विज्ञातुमर्हति।।
फांसी का दंड जिन्होंने दिया उसने हुक्का दिया, इसलिए आभार व्यक्त करते हुए मौलवी अहमद शाह ने अंगे्रज अधिकारियांे के सुरक्षार्थ फैजाबाद शहर में विद्रोह होते ही दूसरे स्थानों पर जो लूटमार होती थी वह न हो, इसलिए सिपाहियों की टोलियां भेजकर नोकबंदी कर दी। सार्वजनिक
कि मेरे कारावास की अवधि में मुझे हुक्का भिजवाने के लिए मैं आभारी हूं। वज्रादपि कठोरराणि मृदूनि कुसुमादपि। लोकोŸाराणां चेतांसि को हि विज्ञातुमर्हति।।
फांसी का दंड जिन्होंने दिया उसने हुक्का दिया, इसलिए आभार व्यक्त करते हुए मौलवी अहमद शाह ने अंगे्रज अधिकारियांे के सुरक्षार्थ फैजाबाद शहर में विद्रोह होते ही दूसरे स्थानों पर जो लूटमार होती थी वह न हो, इसलिए सिपाहियों की टोलियां भेजकर नोकबंदी कर दी। सार्वजनिक