भवन और बारूदखानों पर पहरा बैठाया गया। 15वीं रेजिमेंट के सिपाहियों ने एक युद्ध समिति बनाकर यह तय किया कि अंगे्रज अधिकारियों को मार डाला जाए, परंतु पहले दिए हुए वचन के अनुसार ऐसा करना ठीक नहीं, यह
1857 का स्वातंत्र्य समर - 211
बड़े अधिकारियों ने तय कर अंगे्रजों को जीवित छोड़ दिया। उन्हें सूचित किया गया-‘6आप में से जिनकी इच्दा हो वे अपनी निजी संपŸिा ले जाएं, पर सार्वजनिक संपŸिा में सुतली का टुकड़ा भी आपको नहीं ले जाने दिया जाएगा,
भवन और बारूदखानों पर पहरा बैठाया गया। 15वीं रेजिमेंट के सिपाहियों ने एक युद्ध समिति बनाकर यह तय किया कि अंगे्रज अधिकारियों को मार डाला जाए, परंतु पहले दिए हुए वचन के अनुसार ऐसा करना ठीक नहीं, यह
1857 का स्वातंत्र्य समर - 211
बड़े अधिकारियों ने तय कर अंगे्रजों को जीवित छोड़ दिया। उन्हें सूचित किया गया-‘6आप में से जिनकी इच्दा हो वे अपनी निजी संपŸिा ले जाएं, पर सार्वजनिक संपŸिा में सुतली का टुकड़ा भी आपको नहीं ले जाने दिया जाएगा,