1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

ओर से लड़ रहे राजाओं के घर शरण में आए अंगे्रज मजे में थे। ऐसे हजारों उदाहरण घटित हुए हैं। बुशर लिखता है-‘‘आज मैं अकेला जीवित बचा हूं। भागते-भागते एक गांव में मैं पहंुचा । उसमें घुसते ही जो पहला आदमी मिला वह ब्राह्मण था। मैंने पीने को पानी मांगा। मेरी दुर्दशा देख उसे दया आ गई और उसने कहा-इस गांव में सभी ब्राह्मण हैं, तुझे कोई मारेगा नहीं ं ं। बुली सिंह पीछा करते


1857 का स्वातंत्र्य समर - 212

आया।


1006 of 2102

ओर से लड़ रहे राजाओं के घर शरण में आए अंगे्रज मजे में थे। ऐसे हजारों उदाहरण घटित हुए हैं। बुशर लिखता है-‘‘आज मैं अकेला जीवित बचा हूं। भागते-भागते एक गांव में मैं पहंुचा । उसमें घुसते ही जो पहला आदमी मिला वह ब्राह्मण था। मैंने पीने को पानी मांगा। मेरी दुर्दशा देख उसे दया आ गई और उसने कहा-इस गांव में सभी ब्राह्मण हैं, तुझे कोई मारेगा नहीं ं ं। बुली सिंह पीछा करते


1857 का स्वातंत्र्य समर - 212

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