ओर से लड़ रहे राजाओं के घर शरण में आए अंगे्रज मजे में थे। ऐसे हजारों उदाहरण घटित हुए हैं। बुशर लिखता है-‘‘आज मैं अकेला जीवित बचा हूं। भागते-भागते एक गांव में मैं पहंुचा । उसमें घुसते ही जो पहला आदमी मिला वह ब्राह्मण था। मैंने पीने को पानी मांगा। मेरी दुर्दशा देख उसे दया आ गई और उसने कहा-इस गांव में सभी ब्राह्मण हैं, तुझे कोई मारेगा नहीं ं ं। बुली सिंह पीछा करते
1857 का स्वातंत्र्य समर - 212
आया।
ओर से लड़ रहे राजाओं के घर शरण में आए अंगे्रज मजे में थे। ऐसे हजारों उदाहरण घटित हुए हैं। बुशर लिखता है-‘‘आज मैं अकेला जीवित बचा हूं। भागते-भागते एक गांव में मैं पहंुचा । उसमें घुसते ही जो पहला आदमी मिला वह ब्राह्मण था। मैंने पीने को पानी मांगा। मेरी दुर्दशा देख उसे दया आ गई और उसने कहा-इस गांव में सभी ब्राह्मण हैं, तुझे कोई मारेगा नहीं ं ं। बुली सिंह पीछा करते
1857 का स्वातंत्र्य समर - 212
आया।