1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

मैं एक गली में भागा-वहां मुझे एक बुढ़िया मिली। उसमें झोपड़ी की ओर अंगुली की। मैं वहां गया और वहां लगे भूसे के ढेर में छिप गया। कुछ ही देर में बुली सिंह के लोग वहां आए और तलवार के सिरे इधर-उधर घुसेड़ने लगे। जल्दी ही मैं मिल गया। उन्होंने मुझे बाल पकड़कर खींचते हुए बाहर फेंक दिया। गांव के लोगों ने फिरंगियों पर गालियों की बौछार शुरू की। फिर बुली सिंह मुझे वहां से निकाल दूसरी ओर ले चला। हर गांव में मैं घुटने


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मैं एक गली में भागा-वहां मुझे एक बुढ़िया मिली। उसमें झोपड़ी की ओर अंगुली की। मैं वहां गया और वहां लगे भूसे के ढेर में छिप गया। कुछ ही देर में बुली सिंह के लोग वहां आए और तलवार के सिरे इधर-उधर घुसेड़ने लगे। जल्दी ही मैं मिल गया। उन्होंने मुझे बाल पकड़कर खींचते हुए बाहर फेंक दिया। गांव के लोगों ने फिरंगियों पर गालियों की बौछार शुरू की। फिर बुली सिंह मुझे वहां से निकाल दूसरी ओर ले चला। हर गांव में मैं घुटने


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