1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

टेक शरणागत भाव दिखाता और मुत्यु टल जाती। इस तरह मैं बुली सिंह के बाड़े मंे पहंुचा। वहां से मुझे बहुत दिनों बाद अंगे्रजों की ओर पहुंचा दिया गया। कर्नल मेनाॅक्स लिखता है-‘6जब हम भाग रहे थे तब हमें नाजिम हुसैन खान के आदमियों ने पकड़ लिया। उसमेमं से एक पिस्तौल निकाल दांत भींचता बोला, ‘‘फिरंगियों को चुटकी बजाते गारद करेन की मेरे हाथ फड़फड़ा रहे हैं। परंतु क्या करूं?’ वे हमें उस नाजिम के पास ले गए। वह दरबार


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टेक शरणागत भाव दिखाता और मुत्यु टल जाती। इस तरह मैं बुली सिंह के बाड़े मंे पहंुचा। वहां से मुझे बहुत दिनों बाद अंगे्रजों की ओर पहुंचा दिया गया। कर्नल मेनाॅक्स लिखता है-‘6जब हम भाग रहे थे तब हमें नाजिम हुसैन खान के आदमियों ने पकड़ लिया। उसमेमं से एक पिस्तौल निकाल दांत भींचता बोला, ‘‘फिरंगियों को चुटकी बजाते गारद करेन की मेरे हाथ फड़फड़ा रहे हैं। परंतु क्या करूं?’ वे हमें उस नाजिम के पास ले गए। वह दरबार


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