के डर से हम जनानखाने के पास छिपे रहे। हमें उŸाम अन्न, वस्त्र और आराम मिलता रहा। बाद में हम सबको नेटिवों के वेश में नाजिम ने अंगे्रजी छावनी में पहुंचा दिया।’’
फैजाबाद शहर से अंगे्रज अधिकारियों के भागते ही उस प्रांत के अन्य जिलों ने भी विद्रोह का झंडा खड़ा किया। सुलतानपुर में उसी दिन अर्थात् 9 जून को ही विद्रोह हुआ। तीसरे जिला स्थान सलोनी में 10 जून को विद्रेाह प्रारंभ हुआ। वहां के भागते हुए अधिकारियों
के डर से हम जनानखाने के पास छिपे रहे। हमें उŸाम अन्न, वस्त्र और आराम मिलता रहा। बाद में हम सबको नेटिवों के वेश में नाजिम ने अंगे्रजी छावनी में पहुंचा दिया।’’
फैजाबाद शहर से अंगे्रज अधिकारियों के भागते ही उस प्रांत के अन्य जिलों ने भी विद्रोह का झंडा खड़ा किया। सुलतानपुर में उसी दिन अर्थात् 9 जून को ही विद्रोह हुआ। तीसरे जिला स्थान सलोनी में 10 जून को विद्रेाह प्रारंभ हुआ। वहां के भागते हुए अधिकारियों