1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

में से कुछ के प्राण रूसतमशाह नामक सरदार ने और कुछ के राजा हनुमंत सिंह ने बचाए। अंगे्रज लोगों के शरणागत होने पर केवल उन्हें जीवनदान देकर ही ये अवध के शूर और उदार राजे रूके नहीं बल्कि उन्होंने उनकी यथायोग्य आवभगत भी की। वास्तव में उन प्रत्येक राजा और जमींदारों की अंगे्रजों ने बहुत हानि की थी और उनका अपमान भी किया था। उनका देव राज नामशेष हो गया था और उनके धर्म को नष्ट किया-ये बातें जमींदार और राजे भूल गए थे,


1011 of 2102

में से कुछ के प्राण रूसतमशाह नामक सरदार ने और कुछ के राजा हनुमंत सिंह ने बचाए। अंगे्रज लोगों के शरणागत होने पर केवल उन्हें जीवनदान देकर ही ये अवध के शूर और उदार राजे रूके नहीं बल्कि उन्होंने उनकी यथायोग्य आवभगत भी की। वास्तव में उन प्रत्येक राजा और जमींदारों की अंगे्रजों ने बहुत हानि की थी और उनका अपमान भी किया था। उनका देव राज नामशेष हो गया था और उनके धर्म को नष्ट किया-ये बातें जमींदार और राजे भूल गए थे,


1011 of 2102