में से कुछ के प्राण रूसतमशाह नामक सरदार ने और कुछ के राजा हनुमंत सिंह ने बचाए। अंगे्रज लोगों के शरणागत होने पर केवल उन्हें जीवनदान देकर ही ये अवध के शूर और उदार राजे रूके नहीं बल्कि उन्होंने उनकी यथायोग्य आवभगत भी की। वास्तव में उन प्रत्येक राजा और जमींदारों की अंगे्रजों ने बहुत हानि की थी और उनका अपमान भी किया था। उनका देव राज नामशेष हो गया था और उनके धर्म को नष्ट किया-ये बातें जमींदार और राजे भूल गए थे,
में से कुछ के प्राण रूसतमशाह नामक सरदार ने और कुछ के राजा हनुमंत सिंह ने बचाए। अंगे्रज लोगों के शरणागत होने पर केवल उन्हें जीवनदान देकर ही ये अवध के शूर और उदार राजे रूके नहीं बल्कि उन्होंने उनकी यथायोग्य आवभगत भी की। वास्तव में उन प्रत्येक राजा और जमींदारों की अंगे्रजों ने बहुत हानि की थी और उनका अपमान भी किया था। उनका देव राज नामशेष हो गया था और उनके धर्म को नष्ट किया-ये बातें जमींदार और राजे भूल गए थे,