भी नहीं। उन बहादुर और क्रोधित लोगों ने कुछ अपवाद छोड़कर राजपक्ष के शरणागत लोगों के साथ बहुत दयालुता से व्यवहार किया। जिन्होंने अपने शासनकाल में मदांध होकर अवध के इन्हीं सरदारों को बहुत गहरे घाव किए थे, आज उन्हीं सŸााधारियों के पदच्युत होने पर उन सरदारों ने उनसे वीरोचित सम्मान का व्यवहार किया।’’ अवध के इस वीरोदार्य से यदि बड़े-बड़े अनुभवी और मंजे हुए अंगे्रज अधिकारी जीवित न छूटते तो अवध को फिर से जीतने के लिए अंगे्रजों के नौसिखया लोग कितने काम आते?
भी नहीं। उन बहादुर और क्रोधित लोगों ने कुछ अपवाद छोड़कर राजपक्ष के शरणागत लोगों के साथ बहुत दयालुता से व्यवहार किया। जिन्होंने अपने शासनकाल में मदांध होकर अवध के इन्हीं सरदारों को बहुत गहरे घाव किए थे, आज उन्हीं सŸााधारियों के पदच्युत होने पर उन सरदारों ने उनसे वीरोचित सम्मान का व्यवहार किया।’’ अवध के इस वीरोदार्य से यदि बड़े-बड़े अनुभवी और मंजे हुए अंगे्रज अधिकारी जीवित न छूटते तो अवध को फिर से जीतने के लिए अंगे्रजों के नौसिखया लोग कितने काम आते?