1857 का स्वातंत्र्य समर - 216
में बंद कर दी गई थी। शहर में अवध के वाजिद अली शाह के नाम से उसकी बेगम राज्य चलाने लगी। लखनऊ के घेराव में अंगे्रजों से लड़ने के लिए अनेक शूर नेता अपने-अपने अनुयायियों के साथ उधर आने लगे। जिन्होंने अंगे्रजों को शरणागत और अनाथ अवस्था में भागते हुए जीवनदान दिया था वे सारे जमींदार, जागीरदार और राजा इस समय अपनी उदारता झटककर स्वदेश की मुक्ति के लिए लखनऊ की ओर आने लगे। राजा मान सिंह,
1857 का स्वातंत्र्य समर - 216
में बंद कर दी गई थी। शहर में अवध के वाजिद अली शाह के नाम से उसकी बेगम राज्य चलाने लगी। लखनऊ के घेराव में अंगे्रजों से लड़ने के लिए अनेक शूर नेता अपने-अपने अनुयायियों के साथ उधर आने लगे। जिन्होंने अंगे्रजों को शरणागत और अनाथ अवस्था में भागते हुए जीवनदान दिया था वे सारे जमींदार, जागीरदार और राजा इस समय अपनी उदारता झटककर स्वदेश की मुक्ति के लिए लखनऊ की ओर आने लगे। राजा मान सिंह,