के पवन का संचार करनेवाले इस अद्भुत क्रांति विस्फोट का कुछ एक अंशों में जीवित रहीं अन्य रियासतों पर क्या और कितना प्रभाव हुआ?
सन् 1857 के वर्ष में लोक-मन को यह ज्ञात हो चुका था कि अपने देश पर जब तक विदेशी शासन है तब तक विलुप्त हुई रियासतें जितनी मृतवत् हैं उतनी ही बची हुई रियासतें भी मृतवत् हैं। इस पवित्रतम और महŸाम ध्येय से चैतन्य हुआ हिंदुस्थानी जन-सागर किसी विशेष रंक या राजा के लिए नहीं उफना था। व्यक्ति-रंक या राजा-जिए या मरे,
के पवन का संचार करनेवाले इस अद्भुत क्रांति विस्फोट का कुछ एक अंशों में जीवित रहीं अन्य रियासतों पर क्या और कितना प्रभाव हुआ?
सन् 1857 के वर्ष में लोक-मन को यह ज्ञात हो चुका था कि अपने देश पर जब तक विदेशी शासन है तब तक विलुप्त हुई रियासतें जितनी मृतवत् हैं उतनी ही बची हुई रियासतें भी मृतवत् हैं। इस पवित्रतम और महŸाम ध्येय से चैतन्य हुआ हिंदुस्थानी जन-सागर किसी विशेष रंक या राजा के लिए नहीं उफना था। व्यक्ति-रंक या राजा-जिए या मरे,