1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

देश या राज्य न मरे, मरने नहीं देना है। गुलामी के कालपाश को तोड़कर देश में स्वतंत्रता स्थापित करो, फिर उस लोक हेतु की प्राप्ति के लिए चाहे जितनी झोंपडियां और सिंहासनों की राख के ढेर पर से चलना पड़े, ऐसे लोक पद का रण-घंटा घनघनाया! एक राजा-जो देश को स्वतंत्रता दिलाए वह! अन्य सारे राजा-जो हो बात बराबर!

इसलिए ग्वालियर, इंदौर, राजपूताना, भरतपुर आदि अपना प्राण बचाए जी रही रियासतों के लोकमन को संपूर्ण स्वतंत्र


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देश या राज्य न मरे, मरने नहीं देना है। गुलामी के कालपाश को तोड़कर देश में स्वतंत्रता स्थापित करो, फिर उस लोक हेतु की प्राप्ति के लिए चाहे जितनी झोंपडियां और सिंहासनों की राख के ढेर पर से चलना पड़े, ऐसे लोक पद का रण-घंटा घनघनाया! एक राजा-जो देश को स्वतंत्रता दिलाए वह! अन्य सारे राजा-जो हो बात बराबर!

इसलिए ग्वालियर, इंदौर, राजपूताना, भरतपुर आदि अपना प्राण बचाए जी रही रियासतों के लोकमन को संपूर्ण स्वतंत्र


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