प्रदेश की तरह ही क्रांति समर की चेतना हुई थी। अपना राजा और अपनी रियासत बनी है तो फिर दूसरों के लिए संकट क्यों लिया जाए, यह अमंगल विचार किसी को छू नहीं सका। पराया? एक माता के एक पुत्र को दूसरा पुत्र बाहर।
तो ग्वालियर के सिंधिया, अब आप हमें अंगे्रजों के विरूद्ध लड़ने का ओदश दें।
1857 का स्वातंत्र्य समर - 218
केवल आदेश नहीं, आप हमारे नेता बनें। रणांगण में स्वदेश और स्वधर्म के मंत्र की गर्जना करें
प्रदेश की तरह ही क्रांति समर की चेतना हुई थी। अपना राजा और अपनी रियासत बनी है तो फिर दूसरों के लिए संकट क्यों लिया जाए, यह अमंगल विचार किसी को छू नहीं सका। पराया? एक माता के एक पुत्र को दूसरा पुत्र बाहर।
तो ग्वालियर के सिंधिया, अब आप हमें अंगे्रजों के विरूद्ध लड़ने का ओदश दें।
1857 का स्वातंत्र्य समर - 218
केवल आदेश नहीं, आप हमारे नेता बनें। रणांगण में स्वदेश और स्वधर्म के मंत्र की गर्जना करें