1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

तब ‘युद्ध’ कहने की जगह उसने ‘मित्रता’ कहा। सिंधिया की मित्रता देश के लिए नहीं, अंगे्रजों को बचाने के लिए है-यह देखते हुए कि सिंधिया युद्ध नहीं चाहते तो भी हम युद्ध करेंगे, देश माता को मुक्त करने तू नहीं चल रहा तो तेरे बिना, तेरे विरूद्ध हम दौड़ेंगे और उसे मुक्त करेंगे। आज 14 जून, रविवार है। आज तक हमने सिंधिया की राह देखी। आज रविवार को केवल सूर्यनारारण की राह देखंेगे। सूर्यास्त होते ही हर-हर महादेव! उस गाड़ी में बैठा कौन जा रहा है? कूपलैंड,


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तब ‘युद्ध’ कहने की जगह उसने ‘मित्रता’ कहा। सिंधिया की मित्रता देश के लिए नहीं, अंगे्रजों को बचाने के लिए है-यह देखते हुए कि सिंधिया युद्ध नहीं चाहते तो भी हम युद्ध करेंगे, देश माता को मुक्त करने तू नहीं चल रहा तो तेरे बिना, तेरे विरूद्ध हम दौड़ेंगे और उसे मुक्त करेंगे। आज 14 जून, रविवार है। आज तक हमने सिंधिया की राह देखी। आज रविवार को केवल सूर्यनारारण की राह देखंेगे। सूर्यास्त होते ही हर-हर महादेव! उस गाड़ी में बैठा कौन जा रहा है? कूपलैंड,


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