मेम साहब! खबरदार किसी ने उसे सलाम किया तो ! गोरे को सलाम? आज जून की 14 तारीख को? इस गोरे को ही क्या आगे स्वयं ब्रिगेडियर साहब आ रहा है, परंतु कोई भी सिर या हाथ न हिलाए। ब्रिगेडियर? किसने बनाया इसे ब्रिगेडियर ? प्रासाद शिखरस्थोऽपि काको न गरूडायते अतः अपनी टोली उस ब्रिगेडियर की छाती पर से छाती तानकर चलाओ! और ग्वालियर कांटिंजेंट के सिपाही ब्रिगेडियर को सलाम न करते आगे निकल गए। हृदय गुहा में जाग्रत् हुए
मेम साहब! खबरदार किसी ने उसे सलाम किया तो ! गोरे को सलाम? आज जून की 14 तारीख को? इस गोरे को ही क्या आगे स्वयं ब्रिगेडियर साहब आ रहा है, परंतु कोई भी सिर या हाथ न हिलाए। ब्रिगेडियर? किसने बनाया इसे ब्रिगेडियर ? प्रासाद शिखरस्थोऽपि काको न गरूडायते अतः अपनी टोली उस ब्रिगेडियर की छाती पर से छाती तानकर चलाओ! और ग्वालियर कांटिंजेंट के सिपाही ब्रिगेडियर को सलाम न करते आगे निकल गए। हृदय गुहा में जाग्रत् हुए