1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

को। क्या घर में छिप गया? लगाओ घर मंे आग। घर जलते ही आएगा बाहर चटपट। देखो कौन है? गोरा! काटो उसका सिर! ये कौन-गोरी! ‘‘मत मारो, मत मारो!’’ जा, दिया प्राणदान। हम मेमसाब को नहीं मारेंगे। उस भयानक भूत का नाच चल रहा है जोर-जोर से। ग्वालियर के सिंधिया के राजमहल में भी कोई गोरा बचा न रहे। सारे गोरों को सिंधिया के राज्य के बाहर आगरा भगा दिया। गोरी महिलाओं को इकट्ठी कर कैद कर लिया। पर उनसे कुछ भी बात न की जाए,


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को। क्या घर में छिप गया? लगाओ घर मंे आग। घर जलते ही आएगा बाहर चटपट। देखो कौन है? गोरा! काटो उसका सिर! ये कौन-गोरी! ‘‘मत मारो, मत मारो!’’ जा, दिया प्राणदान। हम मेमसाब को नहीं मारेंगे। उस भयानक भूत का नाच चल रहा है जोर-जोर से। ग्वालियर के सिंधिया के राजमहल में भी कोई गोरा बचा न रहे। सारे गोरों को सिंधिया के राज्य के बाहर आगरा भगा दिया। गोरी महिलाओं को इकट्ठी कर कैद कर लिया। पर उनसे कुछ भी बात न की जाए,


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