यदि कलकŸाा को सन् 1857 के इस अति उग्र विद्रोह की ऐसी अधूरी, धुंधली और अस्पष्ट कल्पना थी तो कलकŸाा से आनेवाली डाक रिपोर्ट पर पूरी तरह अवलंबित इंग्लैंड देश की कल्पना पहले कितनी अज्ञानजनक सुरक्षा में सोई होगी और बाद में एकाएक ज्ञात होने पर कैसे भतबाधाग्रस्त बौराई-सी हो गई, इसकी सहज कल्पना की जा सकती है। पार्लियामेंट में बैरकपुर, रामपुर, दमदम आदि से विद्रोह के समाचार आने के बाद हिंदुस्थान की ओर सबकी
यदि कलकŸाा को सन् 1857 के इस अति उग्र विद्रोह की ऐसी अधूरी, धुंधली और अस्पष्ट कल्पना थी तो कलकŸाा से आनेवाली डाक रिपोर्ट पर पूरी तरह अवलंबित इंग्लैंड देश की कल्पना पहले कितनी अज्ञानजनक सुरक्षा में सोई होगी और बाद में एकाएक ज्ञात होने पर कैसे भतबाधाग्रस्त बौराई-सी हो गई, इसकी सहज कल्पना की जा सकती है। पार्लियामेंट में बैरकपुर, रामपुर, दमदम आदि से विद्रोह के समाचार आने के बाद हिंदुस्थान की ओर सबकी