आ जाएगी उस आदर्श दैवी युग मंे यदि किसी ने विद्रोह किया, यदि किसी ने रक्त बिंदु गिराया और यदि किसी ने ‘प्रतिशोध’ शब्द का उच्चारण किया तो तत्काल उस कृति के कारण और उस उच्चारण से वह पापी अधमत्व को प्राप्त होगा; क्योंकि जहां-तहां सत्य का राज्य हर हृदय में समाया होने पर ‘विद्रोह’ पाप ही होगा। इधर-उधर अहिंसा की समता हर हृदय में दृष्टिगोचर हो रही हो तो रक्त बिंदु गिराना पाप ही होगा और इधर-उधर न्याय के चंद्र
आ जाएगी उस आदर्श दैवी युग मंे यदि किसी ने विद्रोह किया, यदि किसी ने रक्त बिंदु गिराया और यदि किसी ने ‘प्रतिशोध’ शब्द का उच्चारण किया तो तत्काल उस कृति के कारण और उस उच्चारण से वह पापी अधमत्व को प्राप्त होगा; क्योंकि जहां-तहां सत्य का राज्य हर हृदय में समाया होने पर ‘विद्रोह’ पाप ही होगा। इधर-उधर अहिंसा की समता हर हृदय में दृष्टिगोचर हो रही हो तो रक्त बिंदु गिराना पाप ही होगा और इधर-उधर न्याय के चंद्र