संपŸिा उन्होंने बादशाह के खजाने में ईमानदारी से जमा की। इतनी सालंकृत सिद्धता होते ही सारे हिंदुस्थान देश के नाम एक घोषणापत्र-जाहिरनामा-प्रसारित किया गया और उसमें स्पष्टता से घोषित किया गया-‘‘अब विदेशियों के साम्राज्य और फिरंगियों की राज्यसŸाा का अंत हो चुका है और सारा देश अब सवतंत्र और परदासता से मुक्त हो गया है।’’ प्रारंभ में ही इतनी सफल हुई यह क्रांति पूरी करने के लिए हर एक इस क्रांतियुद्ध में अपना एक ईश्वरीय कर्तव्य मानकर,
संपŸिा उन्होंने बादशाह के खजाने में ईमानदारी से जमा की। इतनी सालंकृत सिद्धता होते ही सारे हिंदुस्थान देश के नाम एक घोषणापत्र-जाहिरनामा-प्रसारित किया गया और उसमें स्पष्टता से घोषित किया गया-‘‘अब विदेशियों के साम्राज्य और फिरंगियों की राज्यसŸाा का अंत हो चुका है और सारा देश अब सवतंत्र और परदासता से मुक्त हो गया है।’’ प्रारंभ में ही इतनी सफल हुई यह क्रांति पूरी करने के लिए हर एक इस क्रांतियुद्ध में अपना एक ईश्वरीय कर्तव्य मानकर,