1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

झूठे (व्यक्ति संबंधी) अभिमान भूलकर दैवी प्रेरणा से सहभागी हो, ऐसा आहृान लोगों का किया गया। उसमें कहा गया कि ‘‘हर व्यक्ति यह ध्यान में रखे कि अपना यह विद्रोह केवल स्वधर्म रक्षा के लिए ही है, दूसरा कोई भी लालच इसके पीछे नहीं है। जिस-जिसको परमेश्वर से निश्चय एवं इच्छाशक्ति का वरदान मिला है, वे सब ही ऐहिक लाभ और क्षणभंगुर देह की आशा छोड़कर अपने प्राचीन धर्म का रक्षण करने के लिए हमसे सहयोग करें। सार्वजनिक


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झूठे (व्यक्ति संबंधी) अभिमान भूलकर दैवी प्रेरणा से सहभागी हो, ऐसा आहृान लोगों का किया गया। उसमें कहा गया कि ‘‘हर व्यक्ति यह ध्यान में रखे कि अपना यह विद्रोह केवल स्वधर्म रक्षा के लिए ही है, दूसरा कोई भी लालच इसके पीछे नहीं है। जिस-जिसको परमेश्वर से निश्चय एवं इच्छाशक्ति का वरदान मिला है, वे सब ही ऐहिक लाभ और क्षणभंगुर देह की आशा छोड़कर अपने प्राचीन धर्म का रक्षण करने के लिए हमसे सहयोग करें। सार्वजनिक


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