1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

भूमि से हर एिक फिरंगी को भगा देना या उसे मार डालना हर एक स़्त्री-पुरूष का पवित्र कर्तव्य है। ऐहिक लाभ की कोई भी आशा न रखते हुए जो धार्मिक कर्तव्य-भावना से प्रेरित हैं, वे हमसे आकर मिलें।’’

उपर्युक्त उद्धरण समय-समय पर अवध और दिल्ली से समान अर्थ के जो जाहिरनामे (घोषणापत्र) प्रसारित हुए थे, उनमें से ही लिये गए हैं। एक जाहिरनामा स्वयं दिल्ली के बादशाह ने प्रकाशित किया था और उसकी प्रसिद्धि सारे हिंदुस्थान


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भूमि से हर एिक फिरंगी को भगा देना या उसे मार डालना हर एक स़्त्री-पुरूष का पवित्र कर्तव्य है। ऐहिक लाभ की कोई भी आशा न रखते हुए जो धार्मिक कर्तव्य-भावना से प्रेरित हैं, वे हमसे आकर मिलें।’’

उपर्युक्त उद्धरण समय-समय पर अवध और दिल्ली से समान अर्थ के जो जाहिरनामे (घोषणापत्र) प्रसारित हुए थे, उनमें से ही लिये गए हैं। एक जाहिरनामा स्वयं दिल्ली के बादशाह ने प्रकाशित किया था और उसकी प्रसिद्धि सारे हिंदुस्थान


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