1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

भर में व्यापक रूप से हुई थी। देश के सुदूर दक्षिण सिरे तक उसकी प्रतियां हाथोहाथ बाजार और सेना में भी पहुंच गई थी। उसमें कहा गया था-‘‘हे हिंदू और मुसलमान भाइयों! अपने पवित्र धार्मिक कर्तव्य की पूर्ति करने के लिए हमने जनता से हाथ मिलाया है। इस समय कोई डरपोकपना दिखाए या ढोंगी अंगे्रजों के झूठे आश्वासनों पर विश्वास करे, उसके मुंह पर कुछ ही समय बाद कालिख पोती जाएगी और इंग्लैंड का स्वामित्व स्वीकार कर उससे


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भर में व्यापक रूप से हुई थी। देश के सुदूर दक्षिण सिरे तक उसकी प्रतियां हाथोहाथ बाजार और सेना में भी पहुंच गई थी। उसमें कहा गया था-‘‘हे हिंदू और मुसलमान भाइयों! अपने पवित्र धार्मिक कर्तव्य की पूर्ति करने के लिए हमने जनता से हाथ मिलाया है। इस समय कोई डरपोकपना दिखाए या ढोंगी अंगे्रजों के झूठे आश्वासनों पर विश्वास करे, उसके मुंह पर कुछ ही समय बाद कालिख पोती जाएगी और इंग्लैंड का स्वामित्व स्वीकार कर उससे


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