राष्ट्र का अपमान धो सकने और राष्ट्र की होने वाली दुर्गति रक्तपात से पोंछ डालने योग्य भयानक प्रतिशोध अंगे्रजों से लेने की प्रबल लालसा से, दिल्ली शहर के सभी सिपाहियों की आंखे आग बरसाने लगीं। हवा की हर लहर से, सूर्य की प्रत्येक किरण से, तोप के धूम-धड़ाके से और तलवार की खनखनाहट से प्लासी का प्रतिशोध, प्लासी का बदला-ऐसी एक ही ध्वनि घनघोर होकर बाहर आ रही थी। प्लासी के दुःखदायी रणक्षेत्र का यह शत सांवत्सरिक
राष्ट्र का अपमान धो सकने और राष्ट्र की होने वाली दुर्गति रक्तपात से पोंछ डालने योग्य भयानक प्रतिशोध अंगे्रजों से लेने की प्रबल लालसा से, दिल्ली शहर के सभी सिपाहियों की आंखे आग बरसाने लगीं। हवा की हर लहर से, सूर्य की प्रत्येक किरण से, तोप के धूम-धड़ाके से और तलवार की खनखनाहट से प्लासी का प्रतिशोध, प्लासी का बदला-ऐसी एक ही ध्वनि घनघोर होकर बाहर आ रही थी। प्लासी के दुःखदायी रणक्षेत्र का यह शत सांवत्सरिक