का केवल दर्शन ही नहीं कराता बल्कि वह लोगों की कुल विचारधारा और घटनाओं पर भी प्रकाश डालता है-
‘‘रूहेलखंड की विद्रोही सिपाही टुकड़ियां जल्दी ही आने वाली हैं, इस अपेक्षा में यमुना का पुल ठीक कर लिया गया। तारीख 2 जुलाई को प्रातः नवाब अहमद कुली खान अपने सरदारों और नागरिकों के साथ रूहेलखंड की सेना का स्वागत करने सामने गया। उस समय हकीम अहसनुल्ला खान, सेनापति सनद खान, इब्राहिम अली खान, गुलाम कुली खान और अन्य
का केवल दर्शन ही नहीं कराता बल्कि वह लोगों की कुल विचारधारा और घटनाओं पर भी प्रकाश डालता है-
‘‘रूहेलखंड की विद्रोही सिपाही टुकड़ियां जल्दी ही आने वाली हैं, इस अपेक्षा में यमुना का पुल ठीक कर लिया गया। तारीख 2 जुलाई को प्रातः नवाब अहमद कुली खान अपने सरदारों और नागरिकों के साथ रूहेलखंड की सेना का स्वागत करने सामने गया। उस समय हकीम अहसनुल्ला खान, सेनापति सनद खान, इब्राहिम अली खान, गुलाम कुली खान और अन्य