अपनी सेवा कर रहे निरपराध भिश्तियों और अन्य भारतीय लोगों को मार उनके टुकड़े-टुकड़े करके रक्त कुंड में डाल लिया।
सच में देखा जाए तो इन्हीं भिश्तियों और अन्य भारतीय लोगों ने अंगे्रजी सेना को उसकी उŸाम सेवा-चाकरी कर लड़ने की स्थिति में बनाए रखा था। पर 14 जुलाई के आक्रमण में इससे बुरी स्थिति हुई। क्योंकि इसी दिन शूर चेंबरलेन को एक सिपाही
1857 का स्वातंत्र्य समर - 248
ने गोली चलाकर मार डाला। चेंबरलेन
अपनी सेवा कर रहे निरपराध भिश्तियों और अन्य भारतीय लोगों को मार उनके टुकड़े-टुकड़े करके रक्त कुंड में डाल लिया।
सच में देखा जाए तो इन्हीं भिश्तियों और अन्य भारतीय लोगों ने अंगे्रजी सेना को उसकी उŸाम सेवा-चाकरी कर लड़ने की स्थिति में बनाए रखा था। पर 14 जुलाई के आक्रमण में इससे बुरी स्थिति हुई। क्योंकि इसी दिन शूर चेंबरलेन को एक सिपाही
1857 का स्वातंत्र्य समर - 248
ने गोली चलाकर मार डाला। चेंबरलेन