की मृत्यु के कारण हुई राष्ट्रीय हानि एवं दुःख का वर्णन अंगे्रज इतिहासकार इन शब्दों में करते हैं-‘‘हमारे पक्ष का श्रेष्ठ योद्धा, कीर्ति से पहला और सम्मान में प्रथम! चेंबरलेन का शव जिस हमारे शिविर में फिर से लाया गया वह हमारे इतिहास का एक अति दुःखदायी दिन था।’’
इस तरह 15 जुलाई बीत गई, फिर भी दिल्ली के प्रासाद-शिखर अपने मस्तकों पर सूर्य किरण-से चमचमाते ध्वज, पताका, झंडियां खड़े कर विश्व को चिल्लाकर कह रहे थे कि दिल्ली शहर दे रही थी,
की मृत्यु के कारण हुई राष्ट्रीय हानि एवं दुःख का वर्णन अंगे्रज इतिहासकार इन शब्दों में करते हैं-‘‘हमारे पक्ष का श्रेष्ठ योद्धा, कीर्ति से पहला और सम्मान में प्रथम! चेंबरलेन का शव जिस हमारे शिविर में फिर से लाया गया वह हमारे इतिहास का एक अति दुःखदायी दिन था।’’
इस तरह 15 जुलाई बीत गई, फिर भी दिल्ली के प्रासाद-शिखर अपने मस्तकों पर सूर्य किरण-से चमचमाते ध्वज, पताका, झंडियां खड़े कर विश्व को चिल्लाकर कह रहे थे कि दिल्ली शहर दे रही थी,