के कारण कोई ढिलाई नहीं आने दी। हैवलाॅक के साथ जानेवाली सेना की उसने स्वयं की सेना जैसी ही उŸाम व्यवस्था की। उसे दाने-चारे की सहायता की और हैवलाॅक के आते ही अपना चार्ज उसको बिना किसी विवाद के सौंप दिया। इस सेना के कानपुर के अंगे्रजों की सहायता के लिए जाने की तैयारी होने पर हैवलाॅक बड़े उत्साह से उधर जाने को था कि उसे समाचार मिला कि कानपुर में सर हो व्हीलर ने पराजित होकर विद्रोहिायों के सामने समर्पण कर
के कारण कोई ढिलाई नहीं आने दी। हैवलाॅक के साथ जानेवाली सेना की उसने स्वयं की सेना जैसी ही उŸाम व्यवस्था की। उसे दाने-चारे की सहायता की और हैवलाॅक के आते ही अपना चार्ज उसको बिना किसी विवाद के सौंप दिया। इस सेना के कानपुर के अंगे्रजों की सहायता के लिए जाने की तैयारी होने पर हैवलाॅक बड़े उत्साह से उधर जाने को था कि उसे समाचार मिला कि कानपुर में सर हो व्हीलर ने पराजित होकर विद्रोहिायों के सामने समर्पण कर