में दहशत बैठ गई और वे अपनी तोपें रणांगण में छोड़कर भागने लगे। उनका पीछा करना संभव न होने से उन्हें छोड़ अंगे्रजी सेना फतेहपुर शहर में घुस गई। इस फतेहपुर शहर ने जब विद्रोह किया था तब वहां की अगुवाई अंग्रेज सरकार के नौकर, डिप्टी मजिस्टेªट के पद पर आसीन हिकमतुल्ला नामक एक मुसलमान ने की थी। और इस शहर में यूरोपियन अधिकारियों का रक्त भी विद्रोही नागरिकों की तलवारों ने पिया था। उस रक्तप्रिय शहर पर अब प्रतिशोध की तलवार आ पड़ी। विद्रोह होने पर लोगों
में दहशत बैठ गई और वे अपनी तोपें रणांगण में छोड़कर भागने लगे। उनका पीछा करना संभव न होने से उन्हें छोड़ अंगे्रजी सेना फतेहपुर शहर में घुस गई। इस फतेहपुर शहर ने जब विद्रोह किया था तब वहां की अगुवाई अंग्रेज सरकार के नौकर, डिप्टी मजिस्टेªट के पद पर आसीन हिकमतुल्ला नामक एक मुसलमान ने की थी। और इस शहर में यूरोपियन अधिकारियों का रक्त भी विद्रोही नागरिकों की तलवारों ने पिया था। उस रक्तप्रिय शहर पर अब प्रतिशोध की तलवार आ पड़ी। विद्रोह होने पर लोगों