उत्पन्न करने का कैसा सुदीर्घ प्रयास चल रहा था, यह इससे स्पष्ट होता है। सन् 1857 जैसी प्रचंड क्रांति ऐसे कारणों से उत्पन्न होगी, यह कहनेवाले मंद या कुटिल बुद्धि के लोगों को क्रांति एक अविवेकी मूर्खों का समाज लगता है; लेकिन इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि यदि सन् 1857 की क्रांति मुख्यतः कारतूसों के कारण ही प्रदीप्त हुई तो उसमें नाना साहब, दिल्ली का बादशाह, झांसी की रानी या रोहिलखंड का खान बहादूर कैसे सम्मिलित
उत्पन्न करने का कैसा सुदीर्घ प्रयास चल रहा था, यह इससे स्पष्ट होता है। सन् 1857 जैसी प्रचंड क्रांति ऐसे कारणों से उत्पन्न होगी, यह कहनेवाले मंद या कुटिल बुद्धि के लोगों को क्रांति एक अविवेकी मूर्खों का समाज लगता है; लेकिन इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि यदि सन् 1857 की क्रांति मुख्यतः कारतूसों के कारण ही प्रदीप्त हुई तो उसमें नाना साहब, दिल्ली का बादशाह, झांसी की रानी या रोहिलखंड का खान बहादूर कैसे सम्मिलित