1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

जनोचित मृत्यु का दंड दिए जाने पर वह इतना निश्चित दिख रहा था मानो वह मृत्युदंड उसे न दिया जाकर दूसरे ही किसी को दिया जा रहा है। प्रशांत स्थिरता से उठ उसने जज की ओर पीठ फेरी और अपने लिए खड़ी की गई फांसी की ओर वह दृढ़ पदन्यास से चलकर गया। जल्लाद लोग फांसी की अंतिक तैयारी कर रहे थे। रŸाीभर भी कंपित हुए बिना निश्चल मुद्रा से वह जल्लादों के काम को सहज देख रहा था और जरा भी विचलित हुए बिना जैसे योगी समाधि में


1225 of 2102

जनोचित मृत्यु का दंड दिए जाने पर वह इतना निश्चित दिख रहा था मानो वह मृत्युदंड उसे न दिया जाकर दूसरे ही किसी को दिया जा रहा है। प्रशांत स्थिरता से उठ उसने जज की ओर पीठ फेरी और अपने लिए खड़ी की गई फांसी की ओर वह दृढ़ पदन्यास से चलकर गया। जल्लाद लोग फांसी की अंतिक तैयारी कर रहे थे। रŸाीभर भी कंपित हुए बिना निश्चल मुद्रा से वह जल्लादों के काम को सहज देख रहा था और जरा भी विचलित हुए बिना जैसे योगी समाधि में


1225 of 2102