विद्रोह के लिए दानापुर के सिपाहियों से संकेत मिलने के लिए रूकी थी। परंतु उसके पूर्व ही ये प्राणघाती हमले शुरू हो जाने के कारण ऐसी योजना उसके नेताओं की बनी कि अब नीचे कुचले जाने की अपेक्षा साहस से विद्रोह ही किया जाए। जुलाई की 3 तारीख को पटना शहर के पीर अली नामक नेता के
1857 का स्वातंत्र्य समर - 262
घर की ओर मुसलमान जाने लगे। थोड़ी ही देर में उस घर से एक के बाद दूसरा हरा झंडा लिये बाहर निकला और
विद्रोह के लिए दानापुर के सिपाहियों से संकेत मिलने के लिए रूकी थी। परंतु उसके पूर्व ही ये प्राणघाती हमले शुरू हो जाने के कारण ऐसी योजना उसके नेताओं की बनी कि अब नीचे कुचले जाने की अपेक्षा साहस से विद्रोह ही किया जाए। जुलाई की 3 तारीख को पटना शहर के पीर अली नामक नेता के
1857 का स्वातंत्र्य समर - 262
घर की ओर मुसलमान जाने लगे। थोड़ी ही देर में उस घर से एक के बाद दूसरा हरा झंडा लिये बाहर निकला और