1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

‘दीन-दीन’ की गर्जना हो उठी। कोई दो सौ जेहादी लोगों ने उन हरे झंडों के साथ जाकर एक चर्च पर हमला किया। इतने में एक लायल नामक गोरा कुछ सिखों के साथ आता दिखा जिसे पीर अली ने गोली से मार गिराया और फिर उस गोरे रक्त की पहली बलि गिरते ही शेष मुसलमानों ने उस गोरे पर इतनेवार किए कि उसका चेहरा पहचानना भी कठिन हो गया। परंतु जब रैटरे ने अपने सिखों के साथ चढ़ाई की, जब उन राजनिष्ठ सिखों ने स्वदेश बंधुओं पर जोरदार हमला किया,


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‘दीन-दीन’ की गर्जना हो उठी। कोई दो सौ जेहादी लोगों ने उन हरे झंडों के साथ जाकर एक चर्च पर हमला किया। इतने में एक लायल नामक गोरा कुछ सिखों के साथ आता दिखा जिसे पीर अली ने गोली से मार गिराया और फिर उस गोरे रक्त की पहली बलि गिरते ही शेष मुसलमानों ने उस गोरे पर इतनेवार किए कि उसका चेहरा पहचानना भी कठिन हो गया। परंतु जब रैटरे ने अपने सिखों के साथ चढ़ाई की, जब उन राजनिष्ठ सिखों ने स्वदेश बंधुओं पर जोरदार हमला किया,


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