1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

अपने हिंदुस्थान के पेट में सिखों ने जब अपनी तलवारें घुसेड़ी और जब सिखों के शरीर भारत माता के रक्त से लाल होकर शोभित हुए तब उस जोरदार मार के सामने उन मुट्ठी भर क्रांतिकारियों की भीड़ बिखरकर इधर-उधर हो गई। अंगे्रजों ने दंगाकारी लोगों के नेताओं को तुरंत कैछ किया। उसमें लायल को मारनेवाला पीर अली भी था।

पीर अली लखनऊ का मूल निवासी था और कुद समय से पटना में पुस्तक बेचने का कार्य कर रहा था। बेची जानेवाली पुस्तकों


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अपने हिंदुस्थान के पेट में सिखों ने जब अपनी तलवारें घुसेड़ी और जब सिखों के शरीर भारत माता के रक्त से लाल होकर शोभित हुए तब उस जोरदार मार के सामने उन मुट्ठी भर क्रांतिकारियों की भीड़ बिखरकर इधर-उधर हो गई। अंगे्रजों ने दंगाकारी लोगों के नेताओं को तुरंत कैछ किया। उसमें लायल को मारनेवाला पीर अली भी था।

पीर अली लखनऊ का मूल निवासी था और कुद समय से पटना में पुस्तक बेचने का कार्य कर रहा था। बेची जानेवाली पुस्तकों


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