उसका प्रभाव इतना बढ़ा कि समिति के श्रीमान लोगों के द्रव्य सहयोग से उसके धीन अनेक सशस्त्र नौकर रखे गए और उन्हें आदेश मिलते ही अंगे्रजी राज्य के विरूद्ध युद्ध करने की शपथ दिलाई गई। पटना के अंगे्रज अधिकारियों द्वारा अत्याचार प्रारंभ करते ही पीर अली के तेज स्वभाव के लिए चुप रहना कठिन हो गया। वह व्यवहार से बड़ा कर्मठ, स्वाभिमानी और शूर था। उससे स्वदेश की दुर्दशा देखी नहीं गई, इसलिए उसी के बयान के अनुसार-‘‘अपक्व
उसका प्रभाव इतना बढ़ा कि समिति के श्रीमान लोगों के द्रव्य सहयोग से उसके धीन अनेक सशस्त्र नौकर रखे गए और उन्हें आदेश मिलते ही अंगे्रजी राज्य के विरूद्ध युद्ध करने की शपथ दिलाई गई। पटना के अंगे्रज अधिकारियों द्वारा अत्याचार प्रारंभ करते ही पीर अली के तेज स्वभाव के लिए चुप रहना कठिन हो गया। वह व्यवहार से बड़ा कर्मठ, स्वाभिमानी और शूर था। उससे स्वदेश की दुर्दशा देखी नहीं गई, इसलिए उसी के बयान के अनुसार-‘‘अपक्व